All kinds, prepared and extempore,
wise and petty, soothing and not.
Some people want to try a chair
Instead, they start telling 'I love you'
To people who don't know what to be.
नजर मे कुछ आता नहीं इसलिए नजरिया पेश करते है ।
हमने बचपन से सुना
आवश्यक है
जवाब ढूंढना
सवाल पूछना
और मौन रहना
आरोही क्रम में ।
हमारे बोध से बाहर ही रही
जरूरत, कब और कितनी सही
ध्वनि और निःशब्दता की ।
लखनऊ के।
जैसे धरना देते प्रदर्शनकारी
बिना कैमरे के।
सरकारी अनुमानों से भी बङा लगता है
चालीस और सौ का अंतरपर मैं देख रहा था सीधे, एकदम सीधे, बिना मन मचलाए निरंतर।
सारे नुस्खे आजमाने के बाद मा ने किया था ऐलान,
" तुम्हारे अंदर ठहराव नही; भटकती रहती है तुम्हारी आँखे और आने लगती है तुम्हे उबकाई ।
अगर बैठी रहो नजर सीधे साध कर और मन बाँध कर फिर देखो, इसमे है तुम्हारी भलाई ।"
शासक चाहे घर के हो या राज्य के
सर आँखो पर होते है उनके आदेश सारे ,
लिहाजा मुङकर नही देखे गए राजधानी के चौराहे ।
यूं तो ईजाद कर ली गई है मोशन सिकनेस की दवा
पर इसके लिए कबूल करनी होती है बीमारी।कबूलनामो को समझा जाता है कमी, कमजोरी
"मैं नही मानती तुम्हे कमजोर! "
"क्यों ?"
क्योंकि बस मानने से झूठ या सच की बढ़ती हैं ताकत,
और कैमरे के उस तरफ वालों के अनुसार
गायों का मानना हैं कि एक योगी के निर्णय नही होते गलत।
You only deem my words comfortable For they were a seat for your thoughts All kinds, prepared and extempore, wise and petty, soothing and no...