Friday, January 10, 2025



You only deem my words comfortable

For they were a seat for your thoughts

All kinds, prepared and extempore,

wise and petty, soothing and not.

Some people want to try a chair

Instead, they start telling 'I love you'

To people who don't know what to be. 



Friday, May 24, 2024

इत्तेफ़ाकन मुलाक़ात

जिंदगी की जद्दोजहद में प्यार छूट जाता है 
सुबह देर से उठू तो अख़बार छूट जाता है
कहने को अब चाहत नहीं किसी से
पर देख लू उसे तो इंतजार छूट जाता है।

Wednesday, May 5, 2021

ध्वनि बोध


हमने बचपन से सुना 

आवश्यक है 

जवाब ढूंढना 

सवाल पूछना 

और मौन रहना 

आरोही क्रम में । 


हमारे बोध से बाहर  ही रही 

जरूरत, कब और कितनी सही 

ध्वनि और निःशब्दता  की । 


Tuesday, November 17, 2020

मोशन सिकनेस




चालीस - सौ गायें 

बैठी थी बीच चौराहे 

लखनऊ के। 

जैसे धरना  देते प्रदर्शनकारी

 बिना कैमरे के। 

सरकारी अनुमानों से भी बङा लगता है 

चालीस और सौ का अंतर 

पर मैं देख रहा था सीधे, एकदम सीधे, बिना मन मचलाए निरंतर।

सारे नुस्खे आजमाने के बाद मा ने किया था ऐलान,

" तुम्हारे अंदर ठहराव नही; भटकती रहती है तुम्हारी आँखे और आने लगती है तुम्हे उबकाई ।

अगर बैठी रहो नजर सीधे साध कर और मन बाँध कर फिर देखो,  इसमे है तुम्हारी भलाई ।"

शासक चाहे घर के हो या राज्य के

सर आँखो पर होते है उनके आदेश सारे ,

लिहाजा मुङकर नही देखे गए राजधानी के चौराहे ।

यूं तो ईजाद कर ली गई है मोशन सिकनेस की दवा

पर इसके लिए कबूल करनी होती है बीमारी।

कबूलनामो को समझा जाता है कमी, कमजोरी 

"मैं नही मानती तुम्हे कमजोर! "

 "क्यों ?"

क्योंकि बस मानने से झूठ या सच की बढ़ती हैं ताकत,

और कैमरे के उस तरफ वालों के अनुसार 

गायों का मानना हैं कि एक योगी के निर्णय नही होते गलत।

Saturday, July 18, 2020

An old story with new names.



                           कीटनाशक                       



इतिहास की लाठी के सहारे चलता हुआ एक देश 
उसके आभासी मध्य मे स्थित एक प्रदेश। 
उस मध्यता के किसी कोने मे मरता एक परिवार 
आँख चुराकर देखे नृत्य मृत्यु का सकल संसार। 

जब फसलों को दिए जाने वाले कीटनाशक 
को किसान का पेय बनते देखेंगे बालक। 
इकट्ठा हुई भीड़ के कैमरे उन्हे विश्वास दिला देंगे 
गरीब और कीट के अंतर के दीवार गिरा देंगे। 

तमाशा अभी खत्म नहीं, बैठाई जाएगी जाँच 
होगी कारवाई, बनेगी रिपोर्ट, सुर्खियों की बढ़ाई जाएगी आँच। 
दो-दो हाथ करेंगे अफसरशाही और मौलिक अधिकार
मिट्टी के मालिक मौत से करेंगे न्याय की गुहार।           


                                  










Friday, June 12, 2020

हवाई बंटवारा 


इससे पहले की भेदभाव हो जाए तबाह,
और समानता का राज हो जाए। 
आओ हम बाँट दे हवा 
आब-ओ-हवा पक्षपाती  हो जाए ।

कुछ काली
कुछ गोरी हो जाए।
और सांवली-
सी समीर थोङी हो जाए।

 एक हो साक्षर वायु जो चले वेग से,
 उसके अलग एक समूह अनिल अनपढ़ हो जाए। 
बहे जो बादलों के पास वो समीर सरकारी 
जो रेंगे झुग्गी झोपड़ियों मे तो मारुत मुलजिम हो जाए। 

आधी अबला फिजा होगी,
बाकी पवन नर हो जाए।
अमुक बने  तिलकधारी हिन्दू ,
फलां फलां  मुसलमान हो जाए ।

नापा जाए  इक हिस्सा देसी हवा का
सीमा से परे सब परदेसी हो जाए।
हवा चले चाल इंसानों की,
बयार -ए- बंटवारा मे हर किसी का दम घुट जाए। 

You only deem my words comfortable For they were a seat for your thoughts All kinds, prepared and extempore, wise and petty, soothing and no...