Friday, June 12, 2020

हवाई बंटवारा 


इससे पहले की भेदभाव हो जाए तबाह,
और समानता का राज हो जाए। 
आओ हम बाँट दे हवा 
आब-ओ-हवा पक्षपाती  हो जाए ।

कुछ काली
कुछ गोरी हो जाए।
और सांवली-
सी समीर थोङी हो जाए।

 एक हो साक्षर वायु जो चले वेग से,
 उसके अलग एक समूह अनिल अनपढ़ हो जाए। 
बहे जो बादलों के पास वो समीर सरकारी 
जो रेंगे झुग्गी झोपड़ियों मे तो मारुत मुलजिम हो जाए। 

आधी अबला फिजा होगी,
बाकी पवन नर हो जाए।
अमुक बने  तिलकधारी हिन्दू ,
फलां फलां  मुसलमान हो जाए ।

नापा जाए  इक हिस्सा देसी हवा का
सीमा से परे सब परदेसी हो जाए।
हवा चले चाल इंसानों की,
बयार -ए- बंटवारा मे हर किसी का दम घुट जाए। 

Sunday, May 31, 2020

चादर

वो तो अच्छा हुआ कि नहीं ओढ़ते चादर,
मछली, शेर या जीव जैसे चमगादङ।
वरना कैमरे से मशहूर हो जाते,
और इंसानो से ज्यादा कू्र हो जाते।
जैसे छाए हर पर्दे पर भले क्षणिक
मृत मानुष माॅ और बालक इक ।
न शोक की लहर उठी न आंखे तरल हुई
औरत उसपर भी गरीब, मृत आज होए या कल हुई।
कृष्ण गलत कह गए कि अजर-अमर भए आत्मा
वो देश बस इन्द्रियो पर है जिंदा, जहा मरी प्यास पीङित मा।
उस बालक को कुछ याद रहेगा, या कुछ भी भुला पाएगा ।
जीवन पर्यंत चादर ओढेगा, या हर कतरे से कतराएगा।
     
                                                                                

You only deem my words comfortable For they were a seat for your thoughts All kinds, prepared and extempore, wise and petty, soothing and no...